“नींद नहीं भागती—आपका दिमाग sleep mode में जाने से पहले ही mobile mode में फंस जाता है।”
रात को बिस्तर पर जाते ही हम सोचते हैं:
- “बस 5 मिनट phone देखता हूँ”
- “एक reel और… फिर सो जाऊँगा”
लेकिन 5 मिनट कब 1 घंटा बन जाते हैं—पता ही नहीं चलता।
और फिर…
- आँखें बंद नहीं होतीं
- दिमाग शांत नहीं होता
- नींद गायब हो जाती है
आइए समझते हैं इसके असली कारण 👇
1️⃣ Blue Light दिमाग को दिन जैसा signal देती है
मोबाइल की screen से निकलने वाली blue light brain को ये message देती है कि अभी दिन है।
इससे:
- Melatonin (sleep hormone) कम बनता है
- body sleep mode में नहीं जाती
📌 Result: नींद आने में देरी।
2️⃣ Content दिमाग को Overactive बना देता है
Reels, videos, news, chats—सब दिमाग को लगातार stimulate करते हैं।
Brain को मिलता है:
- नए visuals
- नए emotions
- नई information
👉 दिमाग calm होने की बजाय alert हो जाता है।
3️⃣ Dopamine का खेल (Scroll Addiction)
हर नया notification या reel:
- dopamine release करता है
- brain को reward देता है
इससे:
- और देखने का मन करता है
- नींद पीछे चली जाती है
📌 Brain excitement mode में रहता है—sleep mode में नहीं।
4️⃣ Overthinking Trigger हो जाती है
रात को phone देखने से:
- comparisons
- emotional content
- work messages
दिमाग में नई thoughts शुरू हो जाती हैं।
Result:
- सोते समय overthinking
- बार‑बार करवट
- नींद टूटना
5️⃣ Body का Natural Sleep Rhythm बिगड़ जाता है
अगर रोज़ सोने से पहले mobile use करते हैं:
- body का internal clock confuse हो जाता है
- sleep timing delay हो जाती है
👉 कुछ दिन बाद बिना phone देखे भी नींद देर से आती है।
मोबाइल देखने के बाद भी नींद जल्दी लाने के Practical Tips
✔️ सोने से 45–60 मिनट पहले screen बंद करें
✔️ Night mode / blue light filter use करें
✔️ Bed को सिर्फ sleep के लिए रखें
✔️ Phone को तकिए से दूर रखें
✔️ सोने से पहले किताब, music या breathing करें
✔️ Notifications रात में silent रखें
FAQs
Q1. क्या mobile की वजह से insomnia हो सकता है?
👉 हाँ, लगातार देर रात screen use से sleep cycle disturb हो सकती है।
Q2. Night mode से problem खत्म हो जाती है?
👉 नहीं पूरी तरह। Blue light कम होती है, लेकिन mental stimulation फिर भी रहता है।
Q3. सोने से कितनी देर पहले mobile बंद करना चाहिए?
👉 कम से कम 45–60 मिनट पहले।
नींद की सबसे बड़ी दुश्मन सिर्फ देर रात नहीं—
बल्कि सोने से ठीक पहले की screen habit है।
अगर आप चाहते हैं कि नींद खुद आए,
तो दिमाग को भी signal देना होगा कि
अब rest का समय है।

Comments are closed