क्या आपने कभी गौर किया है कि 7–8 घंटे सोने के बाद भी आँखें खुल तो जाती हैं, लेकिन दिमाग और शरीर दोनों दोबारा सोने की ज़िद करने लगते हैं?
बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता, काम शुरू करने में भारीपन लगता है और बार-बार यही ख्याल आता है:
“इतनी नींद के बाद भी नींद क्यों आ रही है?”
यह समस्या आज बहुत आम है। और हैरानी की बात यह है कि ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह नींद की कमी नहीं, बल्कि नींद से जुड़ी कुछ छुपी आदतें और दिमागी हालात होते हैं।
1️⃣ नींद पूरी है, लेकिन गहरी नहीं
नींद सिर्फ घंटों में पूरी नहीं होती, बल्कि उसकी गहराई सबसे ज़्यादा मायने रखती है।
अगर आपकी नींद:
- बार-बार टूटती है
- हल्की रहती है
- सपनों से भरी रहती है
तो शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह recover नहीं कर पाते। नतीजा—सुबह उठते ही फिर से नींद।
2️⃣ दिमाग रात भर भी active रहता है
कई लोग सो तो जाते हैं, लेकिन उनका दिमाग बंद नहीं होता:
- कल के काम
- चिंता
- अधूरे फैसले
- मोबाइल की आदत
शरीर सो जाता है, पर दिमाग alert mode में रहता है। इसलिए सुबह उठने पर दिमाग कहता है—”थोड़ी और नींद चाहिए।”
3️⃣ सोने से पहले स्क्रीन देखने का असर
मोबाइल और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को भ्रमित कर देती है।
यह दिमाग को संकेत देती है कि अभी दिन है, सोने का समय नहीं।
इससे:
- नींद देर से आती है
- नींद की quality खराब होती है
- सुबह उठने पर उनींदापन बना रहता है
4️⃣ शरीर का sleep cycle बिगड़ जाना
हर इंसान का एक natural sleep–wake cycle होता है।
जब:
- रोज़ अलग समय पर सोना
- देर रात तक जागना
- वीकेंड पर ज़्यादा सोना
जैसी आदतें बन जाती हैं, तो शरीर confused हो जाता है।
नींद पूरी होने के बाद भी दिमाग को लगता है कि नींद अधूरी है।
5️⃣ मानसिक थकान नींद को बेअसर बना देती है
हर थकान शरीर की नहीं होती।
- लगातार सोचते रहना
- pressure में रहना
- emotional तनाव
मानसिक थकान नींद की ताकत को कम कर देती है। आप सोते तो हैं, लेकिन दिमाग पूरी तरह शांत नहीं होता।
6️⃣ सुबह अचानक उठ जाना भी कारण है
तेज़ अलार्म के साथ अचानक उठने से शरीर को झटका लगता है।
शरीर अभी rest mode में होता है, लेकिन दिमाग को तुरंत active होना पड़ता है।
इस mismatch से भी सुबह नींद बनी रहती है।
7️⃣ यह आलस नहीं, शरीर का संकेत है
नींद पूरी होने के बाद भी नींद आना अक्सर laziness नहीं होता।
यह संकेत हो सकता है कि:
- नींद की quality ठीक नहीं
- दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल रहा
- lifestyle में संतुलन की कमी है
क्या मदद कर सकता है? (इलाज नहीं, समझ)
कुछ साधारण आदतें नींद की quality सुधार सकती हैं:
- सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना
- हर दिन लगभग एक ही समय पर सोना-जागना
- सोने से पहले दिमाग को शांत करने की कोशिश
- सुबह उठते ही थोड़ी रोशनी और movement
ये बदलाव धीरे असर दिखाते हैं, लेकिन लंबे समय तक फायदेमंद होते हैं।
कब डॉक्टर से बात ज़रूरी है?
अगर:
- रोज़ नींद पूरी होने के बाद भी ज़्यादा उनींदापन रहे
- दिनभर काम करना मुश्किल लगे
- नींद से जुड़ी दूसरी समस्याएँ बढ़ें
तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।
✨ निष्कर्ष
नींद सिर्फ आँखें बंद करने का नाम नहीं है। यह दिमाग और शरीर—दोनों की मरम्मत का समय है।
जब नींद की quality सुधरती है, तो नींद पूरी होने के बाद नींद अपने आप कम हो जाती है।
कभी-कभी ज़्यादा सोने की नहीं, बेहतर सोने की ज़रूरत होती है।

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