क्या आप सुबह उठते ही थके हुए महसूस करते हैं, दिन भर किसी काम में मन नहीं लगता और शाम होते-होते ऊर्जा पूरी तरह खत्म लगती है?
न कोई साफ़ बीमारी, न ज़्यादा मेहनत — फिर भी हर समय एक ही शिकायत:
“Energy ही नहीं रहती”
आज यह समस्या बहुत आम हो गई है। लेकिन low energy का मतलब हमेशा बीमारी नहीं होता। कई बार इसकी वजह हमारे दिमाग, lifestyle और रोज़ की आदतों में छुपी होती है।
1️⃣ शरीर नहीं, दिमाग सबसे पहले थकता है
आज के समय में ज़्यादातर लोग शारीरिक रूप से कम, लेकिन मानसिक रूप से बहुत ज़्यादा काम कर रहे हैं।
- लगातार सोचना
- फैसले लेना
- चिंता करना
- हर समय busy रहने का दबाव
जब दिमाग थक जाता है, तो शरीर खुद-ब-खुद low energy mode में चला जाता है — चाहे आपने ज़्यादा मेहनत की हो या नहीं।
2️⃣ Overthinking energy चुपचाप खा जाती है
Overthinking कोई छोटी आदत नहीं, बल्कि energy drain करने वाली सबसे बड़ी वजहों में से एक है।
- वही बातें बार-बार सोचना
- भविष्य की चिंता
- बीती बातों को दोहराना
दिमाग जितना ज़्यादा उलझा रहेगा, शरीर उतना ही सुस्त महसूस करेगा।
3️⃣ नींद पूरी है, फिर भी energy क्यों नहीं?
कई लोग कहते हैं:
“मैं 7–8 घंटे सोता हूँ, फिर भी low energy रहती है”
क्योंकि:
- नींद की quality खराब होती है
- सोने से पहले स्क्रीन ज़्यादा होती है
- दिमाग पूरी तरह शांत नहीं होता
नींद पूरी होने के बाद भी शरीर पूरी तरह recharge नहीं हो पाता।
4️⃣ लगातार बैठे रहना energy कम कर देता है
दिनभर एक ही जगह बैठे रहना शरीर को slow बना देता है।
- blood circulation धीमा पड़ता है
- muscles inactive हो जाती हैं
- शरीर सुस्ती में चला जाता है
थोड़ी movement न होने पर energy अपने आप गिरने लगती है।
5️⃣ गलत खान-पान और पानी की कमी
Low energy का एक बड़ा कारण basic चीज़ों की कमी भी हो सकती है:
- समय पर न खाना
- बहुत ज़्यादा junk food
- कम पानी पीना
शरीर को सही fuel न मिले, तो energy कैसे बनी रहे?
6️⃣ हर समय busy रहने की आदत
हमने busy दिखने को ही productive मान लिया है।
- बिना रुके काम
- बिना break के दिन
- बिना pause के दिमाग
ऐसे में शरीर धीरे-धीरे energy बचाने लगता है और low energy महसूस होने लगती है।
7️⃣ यह आलस नहीं, शरीर का signal है
Low energy का मतलब यह नहीं कि आप lazy हैं।
अक्सर यह संकेत होता है कि:
- शरीर और दिमाग दोनों overload में हैं
- recovery कम हो रही है
- खुद को सुनने की ज़रूरत है
क्या मदद कर सकता है? (इलाज नहीं, समझ)
कुछ छोटे बदलाव energy को धीरे-धीरे बेहतर कर सकते हैं:
- दिन में थोड़ी physical movement
- screen से breaks लेना
- पानी और खाने पर ध्यान देना
- हर बात पर तुरंत react न करना
- खुद पर बेवजह का दबाव कम करना
ये बदलाव instant नहीं, लेकिन long-term असर दिखाते हैं।
कब doctor से बात ज़रूरी है?
अगर:
- low energy कई हफ्तों तक बनी रहे
- रोज़मर्रा के काम मुश्किल लगने लगें
- चक्कर, सांस फूलना या extreme कमजोरी हो
तो medical advice लेना ज़रूरी है।
✨ निष्कर्ष
हर समय low energy महसूस होना आज की lifestyle का आम संकेत बन चुका है।
कई बार यह बीमारी नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग की थकान होती है जो ध्यान चाहती है।
जब हम थोड़ा रुकना, सुनना और संतुलन बनाना सीखते हैं, तो energy धीरे-धीरे वापस आने लगती है।

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